मंगल दोष भात पूजा क्या है? जानें विधि, महत्व और लाभ

हिन्दू धर्म मे मंगल भात पूजा एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है। यह पूजा तब की जाती है जब किसी व्यक्ति की कुंडली मे मांगलिक दोष पाया जाता है। इस दोष से ग्रसित व्यक्ति के जीवन मे विवाह से संबन्धित समस्याएँ देखने को मिलती है। भात पूजा मंगल दोष निवारण के लिए एक प्रभावी उपाय है। इसे विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोग किया जाता है जो विवाह, करियर, और आर्थिक समस्याओं से पीड़ित हैं।

मंगल भात पूजा क्यों की जाती है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित होता है, तो ‘मांगलिक दोष’ का निर्माण होता है।

‘भात’ का शाब्दिक अर्थ ‘पका हुआ चावल’ होता है। इस पूजा में शिवलिंग रूपी भगवान मंगलनाथ का ताजे चावलों से विशेष श्रृंगार व पूजन किया जाता है। चावल को शुद्धता, शांति और समर्पण का प्रतीक माना गया है। चावल अर्पित करने से मंगल देव का उग्र स्वभाव शांत होता है और जातक को दोष से मुक्ति मिलती है।

भात पूजा कराने के मुख्य कारण:

  • विवाह में देरी: सगाई या विवाह बार-बार तय होकर टूट जाना।
  • वैवाहिक जीवन में तनाव: पति-पत्नी के बीच अकारण क्लेश और मतभेद।
  • करियर व व्यापार में रुकावट: बार-बार धन हानि होना या बनता काम बिगड़ जाना।
  • स्वास्थ्य एवं मानसिक तनाव: अनावश्यक गुस्सा, दुर्घटना का भय या रक्त संबंधी समस्याएं।

उज्जैन में मंगल भात पूजा का विशेष महत्व

यद्यपि भात पूजा देश में कई स्थानों पर की जाती है, लेकिन उज्जैन के श्री मंगलनाथ मंदिर में इसका महत्व अद्वितीय है।

  1. मंगल ग्रह का जन्मस्थान: मत्स्य पुराण और अवंतिका खंड के अनुसार, उज्जैन को मंगल ग्रह की उत्पत्ति का स्थल माना गया है।
  2. अत्यधिक फलदायी: माना जाता है कि उज्जैन की पवित्र भूमि पर शिवलिंग रूपी मंगलनाथ देव का भात पूजन करने से मंगल दोष का निवारण अति शीघ्र होता है।
  3. सकारात्मक ऊर्जा: पूजा के पश्चात बाबा महाकाल और सिद्धवट के दर्शन से जातक को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

मंगल भात पूजा की संपूर्ण विधि

यह पूजा किसी योग्य एवं अनुभवी पंडित जी के मार्गदर्शन में ही संपन्न कराई जानी चाहिए। पूजा की चरणबद्ध विधि निम्न प्रकार है:

  1. गणेश एवं गौरी पूजन: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में भगवान गणेश और माता पार्वती का ध्यान कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। (मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः)
  2. नवग्रह स्थापना एवं कलश पूजन: नवग्रहों का आह्वान किया जाता है और जल, गंगाजल, सुपारी व नारियल से युक्त पवित्र कलश की स्थापना की जाती है।
  3. पंचामृत स्नान: भगवान शिव के प्रतीक स्वरूप शिवलिंग को दूध, दही, शुद्ध घी, शहद और गंगाजल (पंचामृत) से स्नान कराया जाता है।
  4. भात लेपन एवं श्रृंगार: विशेष रूप से तैयार पके हुए चावलों (भात) से शिवलिंग का पूर्ण रूप से आच्छादन (लेपन) किया जाता है और कुमकुम, पुष्प एवं गुलाल अर्पित किया जाता है।
  5. आरती एवं क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में मंगल देव की भव्य आरती की जाती है और जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा मांगी जाती है।

मंगल भात पूजा से मिलने वाले मुख्य लाभ

  • मांगलिक दोष से मुक्ति: कुंडली में स्थित मंगल दोष के दुष्प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
  • शीघ्र विवाह के योग: वैवाहिक जीवन में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।
  • सुखी दाम्पत्य जीवन: पति-पत्नी के बीच आपसी सामंजस्य और प्रेम बढ़ता है।
  • आर्थिक स्थिरता: नौकरी, व्यवसाय और संपत्ति से जुड़े विवादों का समाधान होता है।
  • मानसिक शांति और स्वास्थ्य: क्रोध पर नियंत्रण आता है और सेहत में सुधार होता है।

उज्जैन में मंगल भात पूजा बुकिंग कैसे करें?

मंगल भात पूजा हमेशा शुभ मुहूर्त और पंडित जी द्वारा तय की गई तिथि पर ही करवानी चाहिए। यदि आप उज्जैन में मंगलनाथ मंदिर में विधिवत भात पूजा, अर्क विवाह या कुंभ विवाह संपन्न कराना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए विवरण पर संपर्क कर सकते हैं:

  • संपर्क सूत्र (Call/WhatsApp): 7987119702
  • स्थान: श्री मंगलनाथ मंदिर परिसर, उज्जैन (मध्य प्रदेश)

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply