उज्जैन · शादी से पहले की पूजा

अर्क विवाह और कुंभ विवाह पूजा उज्जैन

शादी में देरी हो रही हो या कुंडली में मंगल दोष बताया गया हो, तो बहुत से परिवार शादी से पहले अर्क विवाह या कुंभ विवाह की पूजा कराते हैं। उज्जैन में पंडित जी इसे पूरे नियम से कराते हैं, आप बस तारीख और जानकारी भेजिए।

✔ कुंडली देखकर बताते हैं कि आपके लिए कौन सी पूजा ठीक है

✔ पूरी पूजा पंडित जी कराते हैं, आपको बस बैठना है

✔ आप उज्जैन आएं या ऑनलाइन जुड़ें

पूजा की तारीख पूछने के लिए जानकारी भेजें

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अर्क विवाह और कुंभ विवाह क्या हैं?

ये दोनों पूजाएं पुरानी परंपरा का हिस्सा हैं। मान्यता है कि जिनकी कुंडली में मंगल दोष है, उनकी शादी से पहले एक प्रतीक के साथ विवाह की पूजा करा लेने से दोष शांत होता है। अर्क विवाह में अर्क (मदार) के पौधे के साथ और कुंभ विवाह में कलश के साथ विवाह की रस्म निभाई जाती है।

उज्जैन को मंगल की जन्मभूमि माना जाता है, इसलिए यहां ये पूजा कराने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

अर्क (मदार) के साथ

अर्क विवाह

अर्क विवाह में विवाह की पूरी रस्में अर्क के पौधे के साथ की जाती हैं। आम तौर पर इसे लड़कों की कुंडली के लिए बताया जाता है।

ये पूजा किनके लिए

  • जिनकी शादी में देरी हो रही है
  • जिनकी कुंडली में मंगल दोष बताया गया है
  • जिनके लिए पंडित जी ने शादी से पहले ये पूजा सुझाई है

कलश (कुंभ) के साथ

कुंभ विवाह

कुंभ विवाह में कलश को भगवान विष्णु का रूप मानकर उसके साथ विवाह की रस्म होती है। आम तौर पर इसे लड़कियों की कुंडली के लिए बताया जाता है।

ये पूजा किनके लिए

  • जिनकी शादी में रुकावट आ रही है
  • जिनकी कुंडली में मंगल दोष बताया गया है
  • जिनके परिवार ने ये पूजा पहले से तय कर रखी है

आपके लिए कौन सी पूजा ठीक है, यह पंडित जी कुंडली देखकर बता देते हैं। कॉल या WhatsApp पर जन्म तारीख, समय और जगह भेजिए।

पूजा में क्या-क्या होता है

01

गणेश पूजन और संकल्प

आपके नाम, गोत्र और पूजा के मकसद के साथ शुरुआत।

02

कलश और देव स्थापना

कलश, नवग्रह और विष्णु जी की स्थापना व पूजन।

03

विवाह की रस्में

अर्क या कुंभ के साथ मंत्रों के साथ पूरी विवाह की रस्म।

04

हवन और आरती

हवन, पूर्णाहुति और आरती।

पूजा से पहले क्या तैयारी रखें

जन्म विवरण

जन्म तारीख, समय और जगह, ताकि पंडित जी कुंडली देख सकें।

तारीख तय करें

शुभ मुहूर्त देखकर तारीख तय होती है। कॉल पर बता दीजिए कब आना चाहते हैं।

कौन-कौन आएंगे

कितने लोग आएंगे, यह पहले बता दें ताकि बैठने का इंतज़ाम रहे।

सामग्री की चिंता नहीं

सामग्री का इंतज़ाम पंडित जी की टीम करती है। आपको जो लाना हो, वह बुकिंग के समय बता दिया जाता है।

अर्क विवाह और कुंभ विवाह: चुनने से पहले जानें

दोनों में फर्क क्या है

अर्क विवाह में अर्क यानी मदार के पौधे के साथ विवाह की रस्म होती है। कुंभ विवाह में कलश को भगवान विष्णु का रूप मानकर उसके साथ रस्म की जाती है। दोनों का मकसद एक ही बताया जाता है: शादी से पहले कुंडली के मंगल दोष को लेकर परंपरा के हिसाब से पूजा कर लेना।

कौन सी पूजा आपके लिए ठीक है

यह कुंडली पर निर्भर करता है। कई बार परिवार की परंपरा भी मायने रखती है। इसलिए पंडित जी पहले आपकी कुंडली देखते हैं, परिवार की बात सुनते हैं और फिर बताते हैं कि अर्क विवाह ठीक रहेगा, कुंभ विवाह, या दोनों।

शादी की तारीख से पहले कब कराएं

अगर शादी की तारीख तय हो चुकी है, तो पूजा उससे पहले करा लेना ठीक माना जाता है। तारीख तय न हुई हो तो भी आप पहले बात करके पूजा का दिन पक्का कर सकते हैं। हम सलाह देते हैं कि कुछ दिन का समय रखकर बुकिंग करें, ताकि शुभ मुहूर्त आराम से मिल सके।

परिवार के लिए आसान तरीका

लड़के या लड़की के माता-पिता चाहें तो साथ बैठ सकते हैं। जो लोग उज्जैन नहीं आ सकते, वे वीडियो कॉल से जुड़ सकते हैं। पूजा आस्था और परंपरा का हिस्सा है, इसलिए हम शादी के नतीजे की कोई गारंटी नहीं देते। हम बस यह देखते हैं कि पूजा पूरे नियम से हो और आपको हर कदम पहले से पता हो।

अर्क विवाह या कुंभ विवाह की तारीख तय करें

पूजा की दक्षिणा पूजा के तरीके के हिसाब से होती है। सही रकम पंडित जी कॉल पर बता देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अपनी जन्म तारीख, समय और जगह भेज दीजिए। पंडित जी कुंडली देखकर बता देते हैं कि आपके लिए कौन सी पूजा ठीक रहेगी।

हां, चाहें तो दोनों एक ही दिन में कराई जा सकती हैं। यह पंडित जी से बात करके तय कर लीजिए।

पूजा के तरीके के हिसाब से समय लगता है। बुकिंग के समय पंडित जी पूरा समय बता देते हैं।

हां। आप वीडियो कॉल से जुड़ सकते हैं और संकल्प आपके नाम से कराया जाता है।

आपकी कुंडली और शुभ मुहूर्त देखकर। पंडित जी कॉल पर आपको सही दिन बता देते हैं।

नहीं, पूजा आस्था और परंपरा का हिस्सा है, इसलिए हम कोई गारंटी नहीं देते। हमारा पूरा ज़ोर इस पर रहता है कि पूजा श्रद्धा और सही तरीके से हो।